गुजरात में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहे भाजपा नेता दिलीप संघानी ने शनिवार को अमरेली में एक कार्यक्रम के दौरान विवादास्पद बयान दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक भारत में श्वेत क्रांति के जनक कहे जाने वाले वर्गीज कुरियन पर उनके कार्यकाल के दौरान अमूल के पैसे से धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है.
कुरियन पर गुजरात में उस मिशनरीज को डोनेशन देने का आरोप लगा है जो धर्मांतरण के काम में लिप्त थीं.
संघानी ने कहा, "जब कुरियन अमूल का नेतृत्व कर रहे थे, तब उन्होंने ईसाई मिशनरीज को डोनेशन दी. आप अमूल के रिकॉर्ड से इस बात का पता लगा सकते हैं और ये मिशनरीज धर्मांतरण के काम में लिप्त थीं."
संघानी ने कहा, "अमूल की शुरुआत त्रिभुवनदास पटेल ने की थी, लेकिन क्या देश में कोई व्यक्ति त्रिभुवनदास पटेल को जानता है? गुजरात के किसानों और मवेशी पालनेवालों ने जो कड़ी मेहनत से पैसा इकट्ठा किया उसे उन्होंने (कुरियन ने) धर्मांतरण के लिए डांग (दक्षिण गुजरात) में दान कर दिया."
भाजपा नेता दिलीप संघानी ने कहा कि जब वह गुजरात सरकार में मंत्री थे तो उनके सामने यह मुद्दा आया था, लेकिन उस वक्त उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई, क्योंकि उस वक्त केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी और वह इस मुद्दे को पूरे देश में फ़ैला सकते थे.
जब अख़बार ने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी इस बारे में जानना चाहा जो इस वक्त विदेश में हैं तो उन्होंने मैसेज कर जवाब दिया, "मुझे जांच करने दें."
कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मिले नॉर्व के पूर्व पीएम
नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री जेल मेग्ने बोंडविक ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाक़ात की है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित इस ख़बर के अनुसार नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री बोंडविक ने श्रीनगर में अलगाववादी नेताओं से मुलाक़ात की है.
बोंडविक साल 2005 तक नॉर्वे के प्रधानमंत्री थे और उनके प्रधानमंत्री काल के दौरान नॉर्वे ने श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच शांति समझौता करवाया था.
समाचार में बताया गया है कि बोंडविक ने हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज़ उमर फ़ारुख से मुलाक़ात की.
उमर फ़ारूख ने इस मुलाक़ात के बारे में बताया कि भारत सरकार उन्हें किसी विदेशी मेहमान से मिलने की इजाज़त नहीं देती है इसलिए वे इस मुलाक़ात से हैरत में थे क्योंकि इसकी जानकारी भारत सरकार को भी है.
Sunday, November 25, 2018
Wednesday, November 7, 2018
3 दिन पहले अगवा किए गए 79 स्कूली बच्चों को रिहा किया गया: सूचना मंत्री
कैमरून के संकटग्रस्त इलाके बामेंडा से रविवार को अगवा किए गए 79 स्कूली बच्चों को रिहा कर दिया गया है। कैमरून के संस्कृति मंत्री ईसा बाकरी ने न्यूज एजेंसी को ये जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में और ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। बाकरी ने यह भी नहीं बताया कि किन हालात या शर्तों पर बच्चों को रिहा किया गया। अगवा करने वालों के बारे में भी उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया वीडियो
अलग राष्ट्र अंबाजोनिया की मांग कर रहे अलगाववादियों ने दावा किया कि बच्चों को उन्होंने अगवा किया है। सोशल मीडिया पर खुद को अंबा बॉय कहने वाले लोगों ने वीडियो रिलीज किया था। इसमें करीब 6 बच्चों से जबरदस्ती उनका नाम और अभिभावकों का नाम बुलवाया जा रहा है। उनका कहना है कि बच्चों मकसद पूरा होने के बाद ही रिहा किया जाएगा। इस वीडियो की अभी पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन, अभिभावकों ने कहा कि वे वीडियो में दिखाए गए बच्चों को पहचान रहे हैं।
अलग राष्ट्र बनाना चाहते हैं अलगाववादी
कैमरून के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिमी इलाके में सशस्त्र अलगाववादियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है। इस दौरान सैकड़ों लोगों की जान गई है। अलगाववादी इस इलाके में अलग देश अंबाजोनिया की स्थापना करना चाहते हैं। अलगवावादियों का कहना है कि वह अंग्रेजी बोलने वाले अल्पसंख्यक हैं और उन्हें फ्रेंच बोलने वाली सरकार हाशिये पर करना चाह रही है।
पश्चिमी चीन के चोंगकिंग शहर स्थित शिंशिजी किंडरगार्टेन में शुक्रवार सुबह एक महिला (39) ने चाकू से 14 बच्चों को घायल कर दिया। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है। इस दौरान लोगों और शिक्षकों ने आरोपी महिला की पिटाई भी की। आरोपी का कहना है कि वह चीन की सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज है। हालांकि, बच्चों पर हमले को लेकर उसने कोई वाजिब वजह नहीं बताई।
घटना के वक्त कक्षाओं में जा रहे थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे हुई। उस वक्त बच्चे खेलने के बाद अपनी कक्षाओं में जा रहे थे। घायल बच्चों को अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
2018 में दो बच्चों की हत्या हुई थी
चीन में पिछले कई सालों में इस तरह के मामले बढ़े हैं। अधिकतर घटनाओं में शामिल लोगों को मानसिक रूप से बीमार बताया गया है। जून 2018 में एक व्यक्ति ने शंघाई में एक स्कूल के पास तीन बच्चों और उनकी मां पर चाकू से हमला किया था। इस घटना में दो बच्चों की मौत हो गई थी। पुलिस का कहना था कि आरोपी व्यक्ति बेरोजगार था और उसने समाज से बदला लेने के लिए यह हमला किया था।
2010 में 20 बच्चों ने जान गंवाई
अब तक हुईं इस तरह की घटनाओं में अधिकतर चाकू या घरेलू विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में चीन की सरकार ने पटाखों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा रखी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2010 में हुए इस तरह के हमलों में 20 बच्चों की मौत हो गई थी।
सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया वीडियो
अलग राष्ट्र अंबाजोनिया की मांग कर रहे अलगाववादियों ने दावा किया कि बच्चों को उन्होंने अगवा किया है। सोशल मीडिया पर खुद को अंबा बॉय कहने वाले लोगों ने वीडियो रिलीज किया था। इसमें करीब 6 बच्चों से जबरदस्ती उनका नाम और अभिभावकों का नाम बुलवाया जा रहा है। उनका कहना है कि बच्चों मकसद पूरा होने के बाद ही रिहा किया जाएगा। इस वीडियो की अभी पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन, अभिभावकों ने कहा कि वे वीडियो में दिखाए गए बच्चों को पहचान रहे हैं।
अलग राष्ट्र बनाना चाहते हैं अलगाववादी
कैमरून के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिमी इलाके में सशस्त्र अलगाववादियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है। इस दौरान सैकड़ों लोगों की जान गई है। अलगाववादी इस इलाके में अलग देश अंबाजोनिया की स्थापना करना चाहते हैं। अलगवावादियों का कहना है कि वह अंग्रेजी बोलने वाले अल्पसंख्यक हैं और उन्हें फ्रेंच बोलने वाली सरकार हाशिये पर करना चाह रही है।
पश्चिमी चीन के चोंगकिंग शहर स्थित शिंशिजी किंडरगार्टेन में शुक्रवार सुबह एक महिला (39) ने चाकू से 14 बच्चों को घायल कर दिया। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है। इस दौरान लोगों और शिक्षकों ने आरोपी महिला की पिटाई भी की। आरोपी का कहना है कि वह चीन की सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज है। हालांकि, बच्चों पर हमले को लेकर उसने कोई वाजिब वजह नहीं बताई।
घटना के वक्त कक्षाओं में जा रहे थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे हुई। उस वक्त बच्चे खेलने के बाद अपनी कक्षाओं में जा रहे थे। घायल बच्चों को अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
2018 में दो बच्चों की हत्या हुई थी
चीन में पिछले कई सालों में इस तरह के मामले बढ़े हैं। अधिकतर घटनाओं में शामिल लोगों को मानसिक रूप से बीमार बताया गया है। जून 2018 में एक व्यक्ति ने शंघाई में एक स्कूल के पास तीन बच्चों और उनकी मां पर चाकू से हमला किया था। इस घटना में दो बच्चों की मौत हो गई थी। पुलिस का कहना था कि आरोपी व्यक्ति बेरोजगार था और उसने समाज से बदला लेने के लिए यह हमला किया था।
2010 में 20 बच्चों ने जान गंवाई
अब तक हुईं इस तरह की घटनाओं में अधिकतर चाकू या घरेलू विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में चीन की सरकार ने पटाखों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा रखी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2010 में हुए इस तरह के हमलों में 20 बच्चों की मौत हो गई थी।
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